श्रीरामचरितमानस
श्रीराम शलाका प्रश्नावली
परंपरा: शुद्ध मन से पूछें। एक प्रश्न एक ही बार। दिन में तीन प्रश्न।
मन में एक प्रश्न रखें
श्रीराम का स्मरण करें। फिर पूछें।
प्रश्न लिखना ज़रूरी नहीं। लिखा प्रश्न इसी फ़ोन पर रहता है।
श्रीराम शलाका प्रश्नावली क्या है
श्रीराम शलाका प्रश्नावली 15 × 15 खानों की एक तालिका है, जिसे परंपरा गोस्वामी तुलसीदास से जोड़ती है: मन में प्रश्न रखकर किसी खाने पर शलाका रखें और हर नौवाँ अक्षर गिनें, तो श्रीरामचरितमानस की नौ चौपाइयों में से एक बनती है, वही उत्तर है। यह तालिका गीता प्रेस, गोरखपुर से छपी श्रीरामचरितमानस की प्रतियों के साथ छपी मिलती है।
नौ उत्तर, अर्थ और प्रसंग सहित
पाँच चौपाइयाँ परंपरा में शुभ मानी जाती हैं, दो संशय की और दो ‘अभी नहीं’ की। हर उत्तर के साथ उसका प्रसंग और आज के लिए उसकी बात दी है।
- शुभ
सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥
sunu siya satya asīsa hamārī pūjihi mana kāmanā tumhārī
हे सीता, हमारी सच्ची आशीष सुनो, तुम्हारी मनोकामना पूरी होगी।
बालकाण्ड · पुष्पवाटिका · माँ गौरी, सीता जी से
- आज आपके लिए
- जो आपने सच्चे मन से माँगा है, वह मिलेगा। अपनी प्रार्थना पर भरोसा रखें।
- शुभ
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥
prabisi nagara kīje saba kājā hṛdayã rākhi kosalapura rājā
नगर में प्रवेश करके, कोसलपुर के राजा श्रीराम को हृदय में रखकर सब काम कीजिए।
सुन्दरकाण्ड · लंका का द्वार · लंकिनी, हनुमान जी से
- आज आपके लिए
- आरंभ करें। राम को हृदय में रखकर हर कदम उठाएँ।
- अभी नहीं
उघरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू॥
ugharahiṃ anta na hoi nibāhū kālanemi jimi rāvana rāhū
कपट अंत में खुल जाता है, उसका निबाह नहीं होता, जैसे कालनेमि, रावण और राहु का हुआ।
बालकाण्ड · आरंभ की वंदना · गोस्वामी तुलसीदास
- आज आपके लिए
- इस काम में कहीं कपट है, आपका या किसी और का। आगे बढ़ने से पहले उसे सुधारें।
- संशय
बिधि बस सुजन कुसंगत परहीं। फनि मनि सम निज गुन अनुसरहीं॥
bidhi basa sujana kusaṃgata parahīṃ phani mani sama nija guna anusarahīṃ
विधि के वश सज्जन कुसंग में पड़ जाते हैं, पर साँप के फन की मणि की तरह अपना गुण नहीं छोड़ते।
बालकाण्ड · सत्संग और कुसंग · गोस्वामी तुलसीदास
- आज आपके लिए
- इस काम से जुड़े लोगों को परखें। संगत ठीक न हो तो भी अपना स्वभाव न छोड़ें।
- संशय
होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
hoihi soi jo rāma raci rākhā ko kari tarka baṛhāvai sākhā
जो राम ने रच रखा है वही होगा। तर्क करके बात की शाखाएँ कौन बढ़ाए।
बालकाण्ड · सती का संशय · भगवान शिव
- आज आपके लिए
- जो आपके हाथ में था, कर लिया। अब परिणाम से बहस न करें, प्रतीक्षा करें और नाम जपें।
- शुभ
मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू॥
muda maṃgalamaya saṃta samājū jo jaga jaṃgama tīratharājū
संतों का समाज आनंद और मंगल से भरा है, जो संसार में चलता-फिरता तीर्थराज प्रयाग है।
बालकाण्ड · संत समाज की वंदना · गोस्वामी तुलसीदास
- आज आपके लिए
- कार्य शुभ है। इसे अच्छे लोगों के साथ और उनकी सलाह से करें।
- शुभ
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
garala sudhā ripu karahiṃ mitāī gopada siṃdhu anala sitalāī
जिसके हृदय में राम हों, उसके लिए विष अमृत हो जाता है, शत्रु मित्र बन जाते हैं, समुद्र गाय के खुर जितना और आग शीतल हो जाती है।
सुन्दरकाण्ड · लंका का द्वार · लंकिनी, हनुमान जी से
- आज आपके लिए
- रास्ते की बाधाएँ जितनी बड़ी दिखती हैं, उतनी हैं नहीं। मन स्थिर रखकर आगे बढ़ें।
- अभी नहीं
बरुन कुबेर सुरेस समीरा। रन सन्मुख धरि काहुँ न धीरा॥
baruna kubera suresa samīrā rana sanmukha dhari kāhũ na dhīrā
वरुण, कुबेर, इंद्र और वायु, इनमें से कोई भी युद्ध में तुम्हारे सामने धैर्य न रख सका।
लंकाकाण्ड · मंदोदरी का विलाप · मंदोदरी, रावण के लिए
- आज आपके लिए
- ताक़त अकेली काफ़ी नहीं होती, रावण के पास सब था। पूछिए कि यह कार्य धर्म के अनुकूल है या नहीं।
- शुभ
सुफल मनोरथ होहुँ तुम्हारे। रामु लखनु सुनि भए सुखारे॥
suphala manoratha hohũ tumhāre rāmu lakhanu suni bhae sukhāre
तुम्हारे मनोरथ सफल हों। यह सुनकर राम और लक्ष्मण प्रसन्न हुए।
बालकाण्ड · गुरु का आशीर्वाद · विश्वामित्र, राम-लक्ष्मण से
- आज आपके लिए
- आपकी मेहनत और सेवा देखी गई है। मनोरथ सफल होगा।
अपने प्रश्न पर सात दिन ठहरें
आपकी बात के लिए गीता से रोज़ एक श्लोक और उसका अर्थ, आपके जीवन के हिसाब से।
मेरा 7 दिन का पाठ बनाएँपहला हफ़्ता मुफ़्त
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्नावली देखने की विधि
- शांत और शुद्ध मन से श्रीराम का स्मरण करें।
- मन में एक ही प्रश्न रखें। एक प्रश्न एक ही बार पूछें।
- आँखें मूँदकर तालिका के किसी खाने पर उँगली या शलाका (तिनका) रखें।
- उस खाने का अक्षर लिखें, फिर हर नौवाँ अक्षर लिखते जाएँ। तालिका का अंत आए तो पहले खाने से गिनती जारी रखें।
- 25 अक्षरों से एक चौपाई बनेगी। उसे नीचे के नौ उत्तरों में देखें और उसके प्रसंग पर मनन करें।
परंपरा के तीन नियम: शुद्ध मन से पूछें, एक प्रश्न एक ही बार पूछें, और दिन में तीन से अधिक प्रश्न न पूछें। ऊपर के तीन दीप यही तीन प्रश्न हैं।
पूरी तालिका
यह वही 225 खानों की तालिका है। किसी भी खाने से शुरू करके हर नौवाँ अक्षर पढ़ें, और अंत पर पहुँचकर पहली पंक्ति से गिनती जारी रखें।
| सु | प्र | उ | बि | हो | मु | ग | ब | सु | नु | बि | घ | धि | इ | द |
| र | रु | फ | सि | सि | रहिं | बस | हि | मं | ल | न | ल | य | न | अं |
| सुज | सो | ग | सु | कु | म | स | ग | त | न | इ | ल | धा | बे | नो |
| त्य | र | न | कु | जो | म | रि | र | र | अ | की | हो | सं | रा | य |
| पु | सु | थ | सी | जे | इ | ग | म | सं | क | रे | हो | स | स | नि |
| त | र | त | र | स | हुँ | ह | ब | ब | प | चि | स | हिं | स | तु |
| म | का | ा | र | र | म | मि | मी | म्हा | ा | जा | हू | हीं | ा | ा |
| ता | रा | रे | री | हृ | का | फ | खा | जू | ई | र | रा | पू | द | ल |
| नि | को | जो | गो | न | मु | जि | यँ | ने | मनि | क | ज | प | स | ल |
| हि | रा | मि | स | रि | ग | द | न्मु | ख | म | खि | जि | म | त | जं |
| सिं | ख | नु | न | को | मि | निज | र्क | ग | धु | ध | सु | का | स | र |
| गु | ब | म | अ | रि | नि | म | ल | ा | न | ढ़ | ती | न | क | भ |
| ना | पु | व | अ | ा | र | ल | ा | ए | तु | र | न | नु | वै | थ |
| सि | हुँ | सु | म्ह | रा | र | स | स | र | त | न | ख | ा | ज | ा |
| र | ा | ा | ला | धी | ा | री | ा | हू | हीं | खा | जू | ई | रा | रे |
श्रीराम शलाका प्रश्नावली कैसे देखें?
दिन में कितने प्रश्न पूछ सकते हैं?
‘अभी नहीं’ वाली चौपाई आए तो क्या करें?
यह प्रश्नावली कहाँ से आई है?
क्या मेरा प्रश्न कहीं भेजा जाता है?
नौ उत्तर वाली चौपाइयाँ कौन सी हैं?
मानस और गीता
अगर आपकी चौपाई मन में रह जाए, तो उसका प्रसंग पढ़ें, और गीता का वह श्लोक भी जो यही बात कहता है। रामायण की पूरी कथा के लिए रामायण पेज देखें।
स्रोत और विधि
तालिका और नौ चौपाइयाँ गीता प्रेस, गोरखपुर की श्रीरामचरितमानस के साथ छपी पारंपरिक प्रश्नावली से हैं, और हमने हर खाने को मानस के पाठ से मिलाकर जाँचा है। अर्थ, प्रसंग और ‘आज आपके लिए’ Wisdom के अपने शब्द हैं, जो गीता प्रेस परंपरा की टीका के अनुसार लिखे गए हैं।